जीवन क्या है?

 जीवन क्या है? 

जादू भरी नगरी है। 

नगरी में तमाम तरह के लोग हैं , कुछ जादूगर भी हैं। 

संघर्ष है , सीता है, गीता है, और माया भी है। 

एक गली में भक्ति भी रहती है। 

तमाम तरह के गलियारे हैं। 

हँसी , ख़ुशी और सुख-दुःख सब एकसाथ खेलते हैं यहाँ। 

झरने भी हैं खारे पानी के और हाँ ! मीठे पानी की बारीक़ धार भी है। 

एक बावड़ी भी है, काली हो गई है नाले की तरह , सबने मिलकर उसे गन्दा कर दिया है। 

पर उसकी ख़ासियत ये है की वो हमेशा खुशबू ही बिखेरती है। 

उसके काले की महक नहीं आती। 

गलियारों में ठंडी हवा के झोंके भी लगते हैं और गरम हवा झुलसा भी जाती है। 

पल पल बदलता है यहाँ का मौसम। 

कभी कभी तेज बारिश की बूंदे पड़ती हैं यहाँ , पर समय की शुष्कता उसे उड़ा  ले जाती है। 

कभी तो दिल करता है की रहने दें इसे थोड़ा तर-बतर , पर

 क्या करें ? 

यहाँ समय की गति और ऋतुओं का बदलाव इसे ठहरने नहीं देता। 

गति है! समय की जीवन की 

उस गति को थामना असंभव है। 

तो क्यों ना इस नगरी को आहिस्ता - आहिस्ता ही पार किया जाए। 

श्रुतिका 19/Nov/2014


Comments

Popular posts from this blog

कलाकार

रंग